मानवाधिकार प्रतिरक्षकों की गैर-कानूनी गिरफ्तारी तत्काल बंद हो!

न्यू ट्रेड यूनियन इनिशिएटिव महाराष्ट्र पुलिस द्वारा देश भर में ट्रेड यूनियन सदस्यों और मानवाधिकार प्रतिरक्षकों के घरों पर समानांतर रूप से की गई छापेमारी और गैर-कानूनी गिरफ़्तारी की कठोर निंदा करता है। पुणे पुलिस ने रांची, दिल्ली, गोवा, मुंबई एवं हैदराबाद में मानवाधिकार प्रतिरक्षकों और ट्रेड यूनियन सदस्यों के घर पर छापा मारा और कामरेड सुधा भारद्वाज को उनके दिल्ली निवास से गिरफ्तार किया, साथ ही उनके घर से लैपटॉप, मोबाइल फ़ोन, किताबें और अन्य पत्र-पत्रिकाएं ज़ब्त कर लीं। यह सभी गिरफ्तारियां और छापेमारी विश्रामबाग पुलिस स्टेशन में दर्ज केस संख्या 04/18  से जुड़ी हैं, जिसका संबंध भीमा-कोरेगाव मामले से है।

कामरेड सुधा भारद्वाज, वकील एवं प्रगतिशील सीमेंट श्रमिक संघ और जान आधारित इंजीनियरिंग मजदूर यूनियन की नेता हैं, जिन्हें आज सवेरे उनके दिल्ली स्थित निवास से  भीमा-कोरेगाव मामले में भारतीय दंड संहिता की धारा 153 (अ), 505 (1) (ब), 117, 120 (ब), 34 एवं धारा 13, 16, 17, 18, 18 (ब), 19, 20, 38, 39, 40 विधिविरुद्ध क्रिया-कलाप (निवारण) अधिनियम, 1967 के तहत गिरफ्तार किया गया। सुधा भी हालिया सरकार और समाज के कुछ ठेकेदारों द्वारा लगातार नफरत की हवा भड़काए जाने की शिकार हैं जहाँ न्याय, समानता और जनवाद की माँग करने वाले लोगों पर लगातार हमला हो रहा है।

भीमा-कोरेगाँव मामले की आड़ में सरकार द्वारा मानवाधिकार प्रतिरोधकों की मनमानी गिरफ्तारी का यह दूसरा मामला है। पहले चक्र में पुणे पुलिस ने 5 समाजसेवकों को गिरफ्तार किया था। इन पाँचों मामलों में किसी को भी ज़मानत नहीं हुई है वहीं दूसरी तरफ दलितों पर हिंसा भड़काने का काम करने वाले दो दक्षिणपंथी नेता – शिव प्रतिष्ठान संस्थान के मनोहर उर्फ संभाजी भीडे या भीड़े गुरुजी और हिन्दू एकता (अघाड़ी) मंच के मिलिंद एकबोटे जिनके खिलाफ अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति (अत्याचार निरोधक) अधिनियम 1989 के तहत कार्यवाही हुई थी उन्हें जमानत मिल गई है।

गुजरात (उना) में हुई हिंसा के बाद से ही दलितों और उनके साथी समूहों में भाजपा की हिन्दुत्ववादी दक्षिणपंथी नीति के खिलाफ राजनैतिक लड़ाई तेज हुई है। 2019 चुनावों की तैयारी में जुटी भाजपा सरकार के लिए यह बड़ी चिंता का विषय है। प्रगतिशील और लोकतांत्रिक आवाज़ उठाने वाले लोगों पर यह केंद्रित हमला दर्शाता है कि केंद्र की भाजपा सरकार बेहद डरी हुई है और इसीलिए प्रतिरोध के स्वर दबाने की कोशिश कर रही है।

न्यू ट्रेड यूनियन इनिशिएटिव कामरेड सुधा भरद्वाज और प्रगतिशील सीमेंट श्रमिक संघ एवं जन आधारित इंजीनियरिंग मजदूर यूनियन के सदस्यों और उन सभी प्रगतिशील नागरिकों के साथ कंधे से कंधा मिला कर खड़ी है जो प्रतिदिन अपने मौलिक अधिकारों पर हमलों का प्रतिरोध कर रहे हैं।

यह हम सब की साझी लड़ाई है और यह लड़ाई हमें जीतनी ही है।

एन वासुदेवन
अध्यक्ष