आमसभा की जबरदस्त शुरुआत : हिस्सा लेने पहुंचे 17 राज्यों के 300 से अधिक प्रतिभागी

नाशिक : 1 अप्रैल 2018

न्यू ट्रेड यूनियन इनिशिएटिव की तीन दिवसीय चौथी आमसभा का शुभारंभ आज 1-4-2018 को नाशिक के श्री कृष्णा लॉन में विशाल जनसभा के साथ हुआ. जनसभा में फ्रांस के सी.जी.टी से कॉ.पैरे सोल्वोस, जापान के जेनरोरेन से कॉ.मिसामिची वातानाबे, श्रीलंका के फ्री ट्रेड जोन एवं जनरल एम्प्लाइज यूनियन के कॉ.एंटन मारकस समेत एक्टू के राजीव डिमरी, एटक के कॉ.भालचंद्र कांगो, सीटू के कॉ डी.ए.कराड, इफ्टू के कॉ. बी. प्रदीप और सर्व श्रमिक संघटना के कॉ. उदय भट ने हिस्सा लिया, जिसमें नाशिक और आस पास के 1000 से भी अधिक सदस्य उपस्थित थे.

तीन दिवसीय आमसभा में हिस्सा लेने महाराष्ट्र सहित असम, बिहार, छत्तीसगढ़, दिल्ली, गोवा, गुजरात, हरियाणा, जम्मू-कश्मीर, पंजाब, झारखण्ड, कर्नाटक,केरल, तमिलनाड, उत्तर प्रदेश, त्रिपुरा और पश्चिम बंगाल के सम्बद्ध यूनियनों से प्रतिनिधि नाशिक पहुचे हैं. इन श्रमिक प्रतिनिधियों में यांत्रिकी, वाहन एवं दावा निर्माता कंपनी के मजदूरों समेत कपड़ा निर्यात क्षेत्र के मजदूर, ठेका सफाई कर्मचारी, आशा एवं आंगनवाड़ी कार्यकर्ता, घरेलु कामगार एवं वन-श्रमजीवी शामिल हैं.

आमसभा का उद्घाटन और अतिथियों का स्वागत करते हुए एन.टी.यु.आई के राष्ट्रीय अध्यक्ष एन.वासुदेवन ने कहा कि दक्षिणपंथी ताकतों और पूंजीपतियों ने साथ मिल कर मजदूरों के अधिकारों का खात्मा करने की ठान ली है. एक ओर जहाँ बेरोज़गारी बढ़ी है वहीं सरकार ठेका प्रथा को बढ़ावा दे कर युवाओं के भविष्य के साथ खिलवाड़ कर रही है. हर कार्यस्थल पर मजदूरों के अधिकारों को कुचला जा रहा है, जिसका सबसे ज्वलंत उदाहरण मारुती सुजुकी के मजदूरों को अपने संगठन बनाने के संवैधानिक अधिकार की मांग करने के लिए आजीवन कारावास की सज़ा भुगतनी पड रही है.

कॉ. वासुदेवन की बातों का समर्थन करते हुए एक्टू के राष्ट्रीय अध्यक्ष राजीव डिमरी ने कहा की मोदी सरकार ने लोगों को अच्छे दिन के सपने दिखाए जबकि असलियत में पकोड़े बेचने के दिन आ गए हैं. उन्होंने ने कहा की सभी ट्रेड यूनियनों को चाहिए की एकजुट हो कर दक्षिणपंथी ताक़तों का सामना करें और एन.टी.यु.आई के साथ भविष्य में और भी बेहतर तारतम्य के साथ काम करने की मंशा जताई. जेनरोरेन के नेताओं ने सहमती जताते हुए बतलाया की की जापान की शिंजो आबे की सरकार भी आम लोगों का वैसे ही दोहन कर रही है जैसे की भारत और अन्य एशियाई देशों की सरकारें कर रही हैं. सामाजिक सुरक्षा पर खर्च घटाया जा रहा है जबकि युद्ध उपकरणों पर होने वाले खर्च में बढ़ोतरी हुई है.

सी.जी.टी नेता पैरे सोल्वोस ने फ्रांस में मजदूर आन्दोलनों की जानकारी देते हुए बताया की फ्रांस में यूनियन को वैश्विक पूंजीपतियों को उनके काम के लिए जवाबदेह करने के लिए एक बड़ी सफलता मिली है. फ़्रांसिसी पूंजीपतियों पर अब किसी भी बाहरी देश में भी श्रमिक अधिकारों का हनन करने का मामला सामने आने पर फ़्रांस की अदालत में अभियोग चलाया जा सकेगा. श्रमिक वर्ग के संघर्ष की इस वैश्विक जीत का लोगों ने हर्षोल्लास के साथ स्वागत किया.

सीटू के वरिष्ठ नेता कॉ.कराड ने कहा की किसान लॉन्ग मार्च के ज़रिये मजदूरों के सरकार को बता दिया है की सरकार चाहे किसी भी पार्टी की क्यों न हो, जनता उसकी जडें हिलाने का माद्दा रखती है. उन्होंने कहा की वक़्त आ गया है की सभी वामपंथी ट्रेड यूनियन एक संयुक्त मोर्चे के तहत सरकार की दमनकारी नीतियों का विरोध करें.

आमसभा के दौरान सिर्फ महाराष्ट्र ही नहीं वरन देश के कुछ सबसे पुराने, लड़ाकू और प्रगतिशील ट्रेड यूनियनों में से एक महाराष्ट्र जनरल कामगार यूनियन, जिसके महासचिव एक दौर में दत्ता सामंत जैसे दिग्गज मजदूर नेता रहे हैं ने आमसभा के दौरान न्यू ट्रेड यूनियन इनिशिएटिव की सम्बद्धता ग्रहण कि. इस मौके पर माहाराष्ट्र जनरल कामगार यूनियन के महासचिव वर्गिस चाको ने कॉ. एन वासुदेवन का आभार व्यक्त किया.

एन.टी.यु.आई के राष्ट्रीय महासचिव कॉ. गौतम मोदी ने श्री वर्गिस चाको के इस भ्रतित्व पूर्ण कदम का धन्यवाद् करते हुए और दिल्ली में आयोजित श्रमिकों के महापड़ाव का उदाहरण देते हुए जोर दिया की प्रगतिशील ट्रेड यूनियनों को श्रमिक मुद्दों पर अपने राजनैतिक मतभेद भुला कर काम करना चाहिए. भूमंडलीय राजनीति पर प्रकाश डालते हुए कॉ. मोदी ने बताया की एशिया ही नहीं वरन पूरे यूरोप और अमरीका में भी श्रमिक वर्ग के यही हाल हैं. भाजपा सरकार की नीतियों की पोल खोलते हुए उन्होंने बतलाया की किस तरह भाजपा सरकार की नोटबंदी जैसी बेतुकी और वस्तु एवं सेवा कर जैसी अधपकी आर्थिक नीतियों के कारण देश को आर्थिक संकट झेलना पद रहा है. बेरोज़गारी की मार झेल रहे युवाओं को प्रशिक्षु होने का तमगा लगा कर पूंजीपतियों को समर्पित कर दिया गया है जहाँ वे ठेके पर काम करने को मजबूर हैं जहाँ उन्हें न्यूनतम वेतन से कम वेतन दिया जाता है और 8 घंटे से भी अधिक काम लिया जाता है. कॉ. मोदी ने एन.टी.यु.आई. के संघर्षशील इतिहास पर प्रकाश डालते हुए कहा कि एन.टी.यु.आई हमेशा से ही ठेका, कैसुअल, बदली, प्रशिक्षु और मानधन कर्मियों के मौलिक मजदूर अधिकारों, उनके लिए सम्मानित वेतन और सुरक्षित कार्यस्थल की मांगों की अगुआई करता रहा है. सामूहिक मोलभाव और अपने पसंद का संगठन बना सकने की मजदूरों के मूलभूत अधिकार के हनन के बढ़ते हुए मामलों पर क्षोभ जताते हुए कॉ. मोदी ने मंच पर उपस्थित नेताओं से आवाहन किया की सभी प्रगतिशील यूनियन मिल कर केंद्र सरकार की सतत विफल होती नवउदारवादी नीतियों का विरोध करें.